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यातायात के नियम :बाल कविता

यातायात के नियम रुको –रुको ,   रुको –रुको लाल बत्ती जारी है , रुकने की अब बारी है , देखो अब बत्ती पिली है , संभलो , अब चलने की तैयारी है , पिली बत्ती यही बता रही है , चलो –चलो , चलो –चलो अपनी –अपनी दिशा चलो , हमारी बत्ती हरी हुई , चलने की हमारी बारी है , दायें केवल दायें चलें , मुड़ने से पहले सावधान रहें , बिना फिजूल क्यूँ हॉर्न दे- थोड़े से समझदार रहें , जल्दीबाजी में क्या रक्खा है , इमर्जन्सी  वाहन को पहले जाने दें , सुनो –सुनो ,सुनो- सुनो रस्ते में चोक्कने रहे ,गलती को मौका मिले नहीं , बेल्ट ,हेलमेट सब चौकस हों ,सीमा से ज्यादा चलें नहीं , एक बात की गाँठ बाँध लें – रास्ता चलते नशा “कभी नहीं “ समय से अपने घर से निकलें , व्यर्थ की तेजी करें नहीं , हम सब की बस ये फरियाद यातायात के नियमों को सब रक्खे याद.

चहकना ,महकना ,बहकना

                                                 चहकना ,महकना ,बहकना बच्चे से बाप हो जाने के सफ़र में ,                                   चहकना अगर विषाद हो जाना है                                   महकना भूले दिनों की बात हो जाना है ,                               ...

Justice for Asifa बलात्कार

Justice for Asifa बलात्कार बलात्कार .......... इस पर सोचने मात्र से ही ह्रदय द्रवित हो जाता है , व्याकुल ,विचलित हो जाता है , दर्द की पराकाष्टा से परे जो मेरी कल्पनाओं से दूर है सिरहन सी दौड़ती है , भय से अंतस में चीख गूंजती है , रोष उमड़ने लगता है , रोम-रोम ज्वलित हो उठता है , अंगारे आँखों में उतरने लगते हैं , उन दरिंदो के अस्तित्व अखरने लगते हैं , वो मासूम सी बच्ची   वहशी जल्लादों के द्वारा कुचली गयी उन्होंने भी, जिनकी बचाने की जिम्मेदारी थी, दरिंदगी की सीमाओं को पार किया , महज आठ साल की बच्ची का सामूहिक   बलात्कार किया , घिनोनी इंसानियत की हद तो देखो , राम के नारे वालो ने , पुलिस का घेराव किया ! निगाहें ताकती रहीं इन्साफ के रहनुमाओं को , वो तो उन भेडियों के हमजात हो गये , न्याय की गुहार ऐसे माहोल में , दूर की कौड़ी हो रही है , देश के आका भरोसे के काबिल नहीं , और –आवाम है ,जाने कौन सी नींद में सो रही है ? दलाल मिडिया और घटिया राजनीती और भिभ्त्स हो रही है ! आठ साल की बच्ची की चीखों से परे इन पर ...

सूरज किस रंग का होता है ?ITE Project 1

ITE project Batisha 28/02/2018                                                             सूरज किस रंग का होता है ? बैकग्राउंड – बच्चो के साथ आकाश ,तारों , ग्रहों ,तारों से बनने वाली आकिर्ति ,धुव्र तारे पर चर्चा की गयी थी , आकाश को धुव्र तारें को पहचानने ,चन्द्रमा के सतत अवलोकन को घर काम दिया गया था , चंद्रमा किस दिशा से निकलता दिखाई देता है ? क्या रोज एक ही दिशा से निकलता है ? ( दो दिवस इन मुद्दों पर चर्चा की गई थी ) आज हाल में ही पढ़ाये गए विज्ञानं विषय के पाठ हमारा सूर्य मंडल के दोहराव व् आकलन के लिए बच्चों के साथ चर्चा शुरू की गई . बच्चो ने सौर मंडल का चित्र बनाया हुआ था ,जिसमें उन्होंने सूर्य और नौ गृह बनाये हुए थे . मेरे द्वारा प्लूटो पर संदेह करने से बच्चो ने बताया की यह बौना ...

INNOVATION FAIR IN EDUCATION

                                                           इनोवेशन मेला -२०१८ इनोवेशन शब्द  सुनते ही जेहन  एक सकारात्मक वैचारिक दृष्टिकोण से लबरेज हो जाता है , एक ऐसा बदलाव जिसकी जरूरत है जो पहले से निर्धारित लक्ष्य की ओर  ले जाने में किये जा रहे प्रयासों को गति देता है . मैंने अपने अनुभव में इनोवेशन का विपरीत शब्द उपयोग होते नहीं देखा है ,इनोवेटिव होना , इनोवेशन करना हमारे व्यक्तितत्व का एक वांछित गुण ही रहा है . नव चेतन स्कूल , खम्भालिया में इनोवेशन मेले के अवलोकन करने का सुयोग मिला , यह गुजरात में शिक्षा में हो रहे नवाचारों में से एक है जो essar  की सहायता से आयोजित किया गया . मैं अपने साथी छगन भाई के साथ पूर्व निर्धारित समय पर आयोजन स्थल पर पहुँच गया था , इस तरह के आयोजन को लेकर अनेकों परिकल्पनाएं  मानस पटल पर बन रही थी, मेरे पूर्व अनुभव इनकी रूपरेखा बना रहे थे . शिक्षक होने के अर्थ में ही मैं इनोवेशन क...

दरिया खारी क्यूँ है ? FICTIONAL STORY OF FRIENDSHIP BETWEEN mountain and Rin chin

                                कहानी दरिया और दरिया की मौजे  - बच्चो से लेकर बड़ो तक सभी को खूब भाती हैं , दरिया की बातें की इसी की तरह गहरी और विस्तार वाली है जो किनारे से हमारी कल्पनाओं से भी परे होती हैं । दरिया-सच्ची , प्रामाणिक , किवदंती , कपोल काल्पनिक , रहस्यमयी   , जादू-टोना   , ऐतिहासिक व रोमांचकारी कहानियों से भी इतनी ही भरी है जितनी पानी से । दरिया कितनी पुरानी है , कितना पानी है इसमें , कितना गहरा और इनसे भी गहरा सवाल दरिया का पानी खारा क्यूँ है ? ये बात उतनी पुरानी है जब समय को मापने के  साधन भी नहीं बने थे न ही मानव को समझ थी की कभी इसकी जरूरत पड़ेगी । मानव आज की तरह सामाजिक कम था , जल –हवा – आकाश का आज की भांति बंटवारा नहीं हुआ था , भाषा भी अपने शैशव काल में ही थी । वो कहते हैं ना की  हमारी सारी आवाज़े कभी खत्म ही नहीं होती , ये तो हवा के साथ घूमती रहती हैं , ये अलग बात है की हम उन्हे सुन नहीं पाते अपने इंसान होने के कारण , पर इंसान है भी तो बला की चीज जो ख...

BEAUTY OF MATHS PASCAL TRIANGLE AMAZING PATTERNS BOOLEAN AND FIBONACCI

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